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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
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Thursday, September 21, 2017

अब देश के बंटवारे का राज समझ आने लगा है-हिन्दी लेख (Now understand county diviisiton-HindiArticle)

अब देश के बंटवारे का राज समझ आने लगा है-हिन्दी लेख
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                                       भारतीय उपमहाद्वीप कभी सोने की खान कहा जाता था। अंग्रेजों ने इसका विभाजन करा दिया। कहते हैं कि 14 अगस्त को पाकिस्तान और 15 अगस्त को भारत बना। पाकिस्तानी कहते हैं कि हमारी संस्कृति भारत से अलग हैं पर एक बात समझ में नहीं आती।  दोनों का लुटना पहले की तरह ही  जारी है और भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध, गदंगी, बाढ़ और बीमारी जैसी आपदायें भी एक जैसी हैं। दोनों तरफ के चैनलों की बहसें देखें तो अगर दोनों देशों की समस्याओं पर बहसें देखें तो अगर वह शहर या देश का नाम लें तो लगता है कि हमारे देश की चर्चा हो रही है। क्या भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन इसलिये ही कराया गया था कि यहां के लोगों बांटकर लूटा जा सके-याद रखें दोनों तरफ से कालाधन आज भी गोरों की बैंकों में वैसे ही जा रहा है जैसे आजादी के पहले जा रहा था।
                                                 आज हमने यूट्यूब पर गज़वा--हिंद यानि भारत ये युद्ध पर अरेबिक धर्म के ठेकेदारों के प्रवचन सुने। इनमें से अधिकतर विद्वान पाकिस्तान के थे जिनकी उद्ूर् में व्याख्या आसानी से समझी जा सकती है। क्या भक्तों में कोई ऐसा प्रकांड विद्वान  समझदार नहीं है जिसने इस गज़वा--हिंद की विषय सामग्री का अध्ययन किया हो।  हमें तो नहीं लगता वरना हिन्दू धर्म के कथित रक्षक इसका खूब प्रचार करते ताकि आम हिन्दू इससे अवगत हो सके। वास्तव में इसमें खतरनाक दर्शन भरा पड़ा है। 
                                            आप जरा यह शब्द सुने-‘खुरासान से काले झंडे लेकर दो लश्कर निकलेंगे। उनका स्वागत करना। यह लश्कर हिन्द के बादशाहों को जब पकड़कर लायेगा और इस्लामिक तख्त के सामने पेश करेगा। इसके सैनिकों को जन्नत मिलेगी। जो जिहाद में मारे जायेंगे वह दो जख से आजाद होंगे।
                                                गज़वा--हिन्द की विषय   सामग्री समझने से यह साफ लगा कि भारत की अगर पटरी चीन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड या यानि ईसाई, यहूदी और बौद्ध राष्ट्र से हो सकती है पर ईरान, पाकिस्तान, सऊदीअरब, फलीस्तीन, अफगानिस्तान, सीरिया, मिस्त्र या इराक से कभी नहीं! अरेबिक धर्म के धार्मिक किताबों में ही हिन्दू धर्म के विरुद्ध जहर भरा पड़ा है। हैरानी इस बात की है कि भक्तों ने डर के बारे कभी उसका बयान ही नहीं किया।  अगर आप इसे थोड़ा सुन लें तो यह समझ में जायेगा किधर्मनिरपेक्षताको मायने क्या हो सकता है।  इनके ग्रंथों में तो युद्ध ही युद्ध भरा पड़ा है तो इसके अनुयायी कैसे चैन से बैठ रह सकते हैं। हिन्दुस्तान में कौन है जो इनसे सदाशयता की उम्मीद करता है। अब हमारी समझ में यह राज रहा है कि भारत का बंटवारा स्वीकार करने वाले महानुभावों को इसका अहसास था इसलिये उन्होंने अपने धर्म की रक्षा के लिये अंग्रेजों की बनायी रेखा पर सहमति दे दी।

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